दुनिया भर में अपनी शिक्षा क्रांति (Education Reforms) और क्लाइमेट एक्टिविज्म के लिए पहचाने जाने वाले सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार उनका मंच लद्दाख की वादियां नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर है। आज उनके आमरण अनशन (Indefinite Hunger Strike) को 17 दिन पूरे हो चुके हैं(14 july), और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है।

आख़िर क्या है इस अनशन की वजह? क्यों देश के बड़े नेता उनसे अनशन तोड़ने की गुहार लगा रहे हैं? आइए इस रिपोर्ट में पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।

1. कब और क्यों शुरू हुआ यह अनशन?

सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरने को अपना समर्थन दिया और खुद आमरण अनशन पर बैठ गए।

मुख्य मांगें (Main Demands):

  • पेपर लीक पर कड़ा एक्शन: देश में हाल ही में हुए NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) के पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग।

  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

  • पीड़ित परिवारों को मुआवजा: उन छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग, जिन्होंने परीक्षा में गड़बड़ियों के तनाव के चलते खुदकुशी (Suicide) कर ली।

  • लद्दाख का मुद्दा: इसके साथ ही वांगचुक ने लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों (6th Schedule) और वहां के पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर भी सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की है।

2. बिगड़ता स्वास्थ्य: हड्डियां दिखने लगीं पर हौसला बुलंद

17 दिनों से बिना कुछ खाए, सिर्फ पानी और नमक के सहारे चल रहे सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य चिंताजनक हद तक गिर चुका है। डॉक्टरों और CJP के हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक:

  • उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है।

  • उनके शरीर में मसल मास (मांसपेशियों) का नुकसान शुरू हो गया है और उन्हें काफी दर्द है।

  • उनका ब्लड प्रेशर लगभग 109/70 mm Hg तक गिर गया है।

इन सब के बावजूद जब CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने उनसे अनशन खत्म करने की गुहार लगाई, तो वांगचुक ने शांति से जवाब दिया:

“मुझसे मेरा अनशन तोड़ने को मत कहो। सरकार से पूछो कि वह आख़िर बात करने के लिए आगे क्यों नहीं आ रही है।”

3. मिल रहा है बड़ा राजनीतिक समर्थन (Political Support)

जैसे-जैसे सोनम सर की हालत खराब हो रही है, देश के लगभग सभी बड़े विपक्षी नेता उनके समर्थन में उतर आए हैं और उन्हें अनशन खत्म करने की सलाह दे रहे हैं:

नेता / लीडर उन्होंने क्या कहा?
अरविंद केजरीवाल (AAP) उन्हें देश की “धरोहर” बताया और कहा कि उनकी जान बेहद कीमती है। वे जल्द ही उनसे मुलाकात करेंगे।
अखिलेश यादव (SP) सोशल मीडिया पर लिखा कि उनका जीवन पूरे देश और पर्यावरण के लिए बेहद कीमती है, इसलिए उन्हें अनशन खत्म करना चाहिए।
उद्धव ठाकरे (Shiv Sena UBT) उनकी सेहत पर चिंता जताई और 20 जुलाई को होने वाले CJP के ‘चलो संसद’ मार्च को अपना पूरा समर्थन दिया।
महुआ मोइत्रा (TMC) कहा कि देश के युवाओं के लिए उनकी लड़ाई रंग ला रही है, अब उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए।

4. आगे क्या? 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च

प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने जल्द ही उनसे कोई सीधी बात नहीं की, तो 20 जुलाई 2026 को — जब संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session) शुरू हो रहा है — तब वे एक बड़ा और शांतिपूर्ण “चलो संसद” मार्च निकालेंगे। इस मार्च को कई छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का भी साथ मिल चुका है।

सरकार इस पूरे मामले पर कब तक चुप्पी तोड़ती है और क्या सोनम वांगचुक का यह आत्मबल देश के युवाओं को न्याय दिला पाएगा, यह आने वाले दिनों sonam में साफ हो जाएगा।