August 27, 2026

युवाओं की नई आवाज़: कौन हैं अभिजीत दिपके? जो छात्रों के हक़ और पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर बन गए हैं सरकार की आंख की किरकिरी!

0

https://samajwadiprahri.online/wp-content/uploads/2026/07/image_search_1784054601821.jpg

जब देश का परीक्षा तंत्र भ्रष्टाचार और पेपर लीक के दलदल में धंसा हो, जब लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में हो और मुख्यधारा का मीडिया मूकदर्शक बना हो—तब कोई तो होना चाहिए जो सड़क पर उतरकर सत्ता की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछ सके। इस वक्त दिल्ली के जंतर-मंतर से युवाओं के हक की लड़ाई का जो सैलाब उठ रहा है, उसके पीछे एक युवा चेहरा बेहद मजबूती से खड़ा है। नाम है—अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke)

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके आज देश के उन चुनिंदा युवा एक्टिविस्ट्स में शामिल हो चुके हैं, जिन्होंने सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ घुटने टेकने से साफ़ इनकार कर दिया है। आइए जानते हैं कौन हैं अभिजीत दिपके और क्यों उनकी यह मुहिम आज सत्ता के गलियारों में खलबली मचा रही है।

1. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और अनोखे विरोध का तरीका

अभिजीत दिपके ने जब युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की शुरुआत की, तो कई लोगों ने इस नाम को मजाकिया समझा। लेकिन इसके पीछे एक गहरा और तीखा सामाजिक कटाक्ष था।

अभिजीत का मानना है कि:

“इस देश की भ्रष्ट व्यवस्था और सत्ताधारियों के लिए आम छात्र और गरीब युवा किसी ‘कॉकरोच’ की तरह ही हैं—जिन्हें कुचलना और नजरअंदाज करना बेहद आसान समझा जाता है। लेकिन व्यवस्था यह भूल गई कि कॉकरोच हर झटके को झेलकर जिंदा रहने की ताकत रखते हैं।”

इसी कड़े संदेश के साथ, अभिजीत ने NEET-UG, NET और देश के तमाम सरकारी परीक्षाओं में हो रहे घोटालों के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल दिया।

2. सोनम वांगचुक को आंदोलन से जोड़ना: एक बड़ी संगठनात्मक जीत

अभिजीत दिपके की सबसे बड़ी ताकत उनकी रणनीतिक सोच और निडरता है। जब जंतर-मंतर पर छात्रों की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही थी, तब अभिजीत ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का काम किया।

  • सोनम वांगचुक का साथ: अभिजीत के निस्वार्थ संघर्ष को देखते हुए ही देश के सम्मानित क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने जंतर-मंतर आकर CJP के इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया और आज वे 17 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं।

  • दिन-रात संघर्ष: सोनम सर के गिरते स्वास्थ्य की पल-पल की रिपोर्ट देश के सामने रखने से लेकर, प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए रहने-खाने और सुरक्षा की व्यवस्था करने तक—अभिजीत दिपके ज़मीनी स्तर पर बिना थके चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।

3. सरकारी तंत्र के सामने सीना ताने खड़े अभिजीत के तीखे सवाल

अभिजीत दिपके केवल भाषण नहीं देते, वे तथ्यों के साथ सरकार को कटघरे में खड़ा करते हैं। सोशल मीडिया से लेकर जंतर-मंतर के मंच तक, उनके ये तीखे सवाल सरकार को असहज कर रहे हैं:

  • मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला: “जब लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो, पेपर खुलेआम बिक रहे हों, तो देश के शिक्षा मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा क्यों नहीं देते? सत्ता की यह हठधर्मिता देश के युवाओं का अपमान है।”

  • पीडित परिवारों की आवाज़: परीक्षा प्रणाली के भ्रष्टाचार और मानसिक प्रताड़ना के कारण जिन छात्रों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों के आंसू पोंछने के बजाय सरकार उन्हें मुआवजा देने और अपनी गलती मानने से क्यों कतरा रही है?

  • सिस्टम में बदलाव की मांग: राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा प्रणाली (जैसे NTA) को पूरी तरह से रीफॉर्म (Re-form) किया जाए, न कि केवल कमेटियों के नाम पर समय टाला जाए।

4. 20 जुलाई का महासंग्राम: ‘चलो संसद’ मार्च की कमान

अभिजीत दिपके के नेतृत्व में CJP और तमाम छात्र संगठनों ने यह साफ कर दिया है कि वे केवल दिल्ली की सड़कों पर बैठने के लिए नहीं आए हैं। आगामी 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिजीत ने “चलो संसद” मार्च का ऐलान किया है।

विपक्ष के बड़े नेताओं जैसे उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल की पार्टियों का इस आंदोलन को समर्थन मिलना यह साबित करता है कि अभिजीत दिपके की अगुवाई में यह छात्रों का गुस्सा अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।

संपादकीय टिप्पणी (Editorial View): इतिहास गवाह है कि जब-जब देश का युवा जागा है, सत्ता के बड़े-बड़े सिंहासन डोले हैं। अभिजीत दिपके जैसे युवा एक्टिविस्ट आज के दौर में यह उम्मीद जगाते हैं कि जब तक देश का युवा अपने हक के लिए लड़ना जानता है, तब तक कोई भी तानाशाही व्यवस्था उनके सपनों को कुचल नहीं सकती। यह लड़ाई केवल पेपर लीक के खिलाफ नहीं है, यह देश के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।

क्या आपको लगता है कि अभिजीत दिपके और CJP की यह मुहिम देश के परीक्षा तंत्र में कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *